ठंड में ठिठुर रहे नौनिहाल

उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। माइनस तापमान के बीच लाहौल-स्पीति जिला के हजारों नौनिहाल आंगनबाड़ी केंद्रों में ठिठुरने को मजबूर हैं। सरकार ने जिले के हर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तो खोल दिए हैं, लेकिन ठंड से निपटने के लिए लकड़ी, कोयला और हीटर की व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया गया है। जिले में 123 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां हजारों की संख्या में बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचते हैं। इन दिनों तापमान लुढ़कने से साफ जाहिर है कि बिना लकड़ी, कोयला और हीटर इन बच्चों की क्या हालत होगी। हालांकि, विभाग ने निदेशालय के माध्यम से सर्दियों से निपटने के लिए बजट के लिए लिखा है, लेकिन आंगनबाड़ी के लिए बजट का प्रावधान अभी तक नहीं हो पाया है। शनिवार को दिन के समय में ही लौहाल घाटी का तापमान शून्य से नीचे चल रहा था। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले नौनिहालों की क्या हालत हुई होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार के दिशानिर्देश के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सुबह दस से दोपहर दो बजे तक चलाना पड़ रहा है। कुछ केंद्रों को चलाने के लिए अभिभावक अपने घर से ही लकड़ी और कोयला ला रहे हैं, तो कई जगह मजबूरन बच्चों को ठंड में ठिठुरना पड़ रहा है। अभिभावक सुनील कुमार, विकास, महेंद्र सिंह, सुनीता, मधुलिका और अर्पणा ने बताया कि अभी ठंड के बीच बच्चों का केंद्र में जाना मुश्किल हो गया है। बर्फबारी के बाद बच्चों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। इन्होंने बताया कि विभाग एक सप्ताह के भीतर लकड़ी, कोयले की व्यवस्था नहीं कर पाता है तो अभिभावक बच्चों को केंद्र में भेजना बंद कर देंगे। सुशील ठाकुर का कहना है कि जब सरकार आंगनबाड़ी केंद्र खुलवा सकती है तो आंगनबाड़ी केंद्र में सर्दियों से निपटने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती है? उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी रणजीत सिंह ने बताया कि गत वर्ष जिला के आंगनबाड़ी केंद्रों को चलाने के लिए लकड़ी और कोयले की व्यवस्था को लेकर 1 लाख 15 हजार रुपये की राशि मिली थी, लेकिन इस बार बजट का कोई प्रावधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध निदेशालय के माध्यम से बजट मांगा गया है।

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